संपादकीय
कर्मयोगी के विचार:
योग किसी संस्कृति या पंथ की संपत्ति नहीं है; यह मानव प्रणाली के लिए एक तकनीक है, जिसे प्रथम योगी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रसारित किया गया था कि प्रत्येक मनुष्य के पास आत्म-मुक्ति के उपकरण हों।
आदियोगी शिव द्वारा सात ऋषियों को योग संचरण पर एक विस्तृत लेख, जिसमें ग्रंथों की तुलना, योगिक आयामों और खगोलीय मानचित्रण पर प्रभावी तालिकाएं शामिल हैं।

संपादकीय
कर्मयोगी के विचार:
योग किसी संस्कृति या पंथ की संपत्ति नहीं है; यह मानव प्रणाली के लिए एक तकनीक है, जिसे प्रथम योगी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रसारित किया गया था कि प्रत्येक मनुष्य के पास आत्म-मुक्ति के उपकरण हों।
श्लोक
Bhagavad Gita 2.48
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
हिंदी अर्थ
हे धनंजय (अर्जुन)! आसक्ति को त्यागकर तथा सफलता और असफलता में समान भाव रखकर योग में स्थित होकर अपने कर्तव्य कर्मों को करो। मन का यह समभाव ही योग कहलाता है।
यह श्लोक "समत्व" को योग की मुख्य अवस्था के रूप में परिभाषित करता है।
खंड

खंड
खंड

| ग्रंथ | सप्तऋषि |
|---|---|
| बृहदारण्यक उपनिषद | गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि |
| महाभारत | मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वशिष्ठ |
| पुराण | विभिन्न मन्वन्तरों के अनुसार परिवर्तनशील |
खंड

खंड

| ऋषि | प्रतिनिधित्व | योगिक आयाम |
|---|---|---|
| मरीचि | प्रकाश और विवेक | ज्ञान योग (विजडम) |
| अत्रि | अद्वैत | आत्मबोध |
| अंगिरस | मंत्र और ध्वनि | नाद योग (कंपन) |
| पुलस्त्य | अनुशासन | यम और नियम (नैतिकता) |
| पुलह | एकाग्रता | धारणा (फोकस) |
| क्रतु | कर्म | कर्म योग (समर्पण) |
| वशिष्ठ | संतुलन | ज्ञान और जीवन का समन्वय |
खंड
खंड

| तारा (Ursa Major) | ऋषि |
|---|---|
| Dubhe | क्रतु |
| Merak | पुलह |
| Phecda | पुलस्त्य |
| Megrez | अत्रि |
| Alioth | अंगिरस |
| Mizar | वशिष्ठ |
| Alkaid | मरीचि |
खंड
खंड
| दृष्टिकोण | मुख्य संदेश |
|---|---|
| योगिक परंपरा | आदियोगी ने कांति सरोवर के तट पर सप्तऋषियों को योग प्रदान किया। |
| प्रतीकात्मक | सप्तऋषि मानव चेतना के सात स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। |
| ऐतिहासिक | वैदिक ऋषि जिन्होंने मौखिक परंपरा के माध्यम से ज्ञान को सुरक्षित रखा (UNESCO विरासत)। |
खंड
| काल | घटना |
|---|---|
| योगिक परंपरा | आदियोगी द्वारा मूल संचरण |
| वैदिक काल | मंत्रों और ऋषि परंपराओं का निर्माण |
| उपनिषद काल | आंतरिक साधना और अद्वैत की ओर झुकाव |
| शास्त्रीय काल | दार्शनिक विस्तार और संहितिकरण (जैसे महाभारत) |
| आधुनिक काल | वैश्विक प्रसार और वैज्ञानिक एकीकरण |
खंड

खंड
संपादकीय दिशा के लिए प्रयुक्त संदर्भ